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कविता
POESY

तीन पीडियाँ या बस तीन सीडीयाँ | एक कविता एक सोच

तीन सीडीयों पर तीन पीडियाँ
हँसी नहीं , ये कोई व्यंग्य नहीं है|
..
बस एक सोच है||
.
.
रास्ता तीन पीडियों का सही, पर फ़ासला
फ़ासला बस तीन सीडीयों का ही है|
.
हाँ…
सोच ही तो है,
कल एक बीज था
आज एक पौधा है, और कल
एक पेड़ होगा
.
.
बस इतनी सी बात
अरे भाई| फल तो पेड़ ही देगा ना||
पर, बीज और पौधे के बिना
क्या पेड़ संभव है?
.
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बात बस इतनी सी है
फ़र्क़ तो सिर्फ़ सोच का है
 .
अपनी अपनी जगह सब सही हैं
सब ज़रूरी भी हैं
.
पर जहाँ सब सही होते हैं, वहाँ सब सही
.. नही होता है
हर कोई काटता वही है, जो वो बोता है
.
बस
बात इतनी सी है
फ़र्क़
सिर्फ़ सोच का है
.
दादी के अनुभव का स्वाद, माँ के खाने मे है
और माँ के खाने की ताक़त, बच्चे के कुछ कर जाने मे है
.
हर पीडी को ये समझना होगा
किसी को
थोड़ी रफ़्तार बढ़ानी होगी, और किसी को
थोड़ा थमना होगा
मैने खुद के जीवन मे भी ये पाया है
मेरी माँ के दिशा निर्देशों में, दादी के अनुभवों का साया है
जिन्हे मेरे विचारों ने, समझ के
और भी चमकाया है
.
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आगे चड़ने के बाद भी, पिछ्ली सीड़ी का अनुभव बहोत ज़रूरी है
तीनों पीडियों का सामन्जस्य ही हमारे जीवन की धुरी है||

 

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Jasvinder Kaur Khera
Jasvinder is someone, pursuing life.. enjoying life... She loves to write and that's the way she admires herself and feels joyous about life.